एक बार शिव और पार्वती को विचरण करते करते इस स्थान पर एक शिला दिखाई दी जिस
पर माता पार्वती विश्राम करने लगी विश्राम करते समय माता पार्वती को असीम शान्ति का
अनुभव होने लगा और वह आनन्दित होने लगी तभी वहाँ एक बालक आया और माता के पैरो
को दबाने लगा, यह सब देखकर माता पार्वती को बडा आश्चर्य होने लगा तब उन्होने शंकरजी
से पूछा कि एस स्थान पर मै इतनी आनन्दित एव शान्ति का अनुभव क्यों कर रही हूँ और यह
बालक मेरे पैर क्यों दबा रहा है? तब श्री शंकर भगवान ने उन्हें बताया कि देवी जी जब
आप पूर्व जन्म मे सती हुई थी तब यहाँ पर तुम्हारे शरीर के अंग का रक्त व माँस का एक
भाग गिर गया था जो इस शिला के गर्भ में समाया हुआ है और यह बालक उसी रक्त का ही
एक रूप है और तभी से इस शिला को अपनी माता का ही रूप मानकर इसकी रक्षा कर रहा
है। और आपके साक्षात दर्शनो की अभिलाषा लिए हुए आपकी उपासना कर रहा है जो आज
पूरी हो गई है तब माता ने कहा मेरा मन यहाँ पर अपने पुत्र के साथ रहने के लिए उत्सुक है।
तब शंकर भगवान ने कहा कि हे देवी आप यहाँ पर विलवका क्षेत्र में जो गंगा से चार मील
दूरी पर है मे रहकर कलयुग में सर्वमंगला देवी के रूप में भक्तो का कल्याण करोगी और यह
बालक लागुरिया के नाम से प्रसिद्ध होगा
प्राचीन काल में इस क्षेत्र में बेल पत्तो का वाहुल्य होने के काराण क्षेत्र का नाम विलवकादा
तथा इस गाँव का बिलवन गाँव जो बाद में परिवर्तित होकर बेलौन हो गया और माता का भी
दूसरा नाम माँ बेला भवानी पडा कालान्तर में समम चक्र बदला माता का स्थान बेल पत्रो के
बगीचे से घिरा होंने के कारण वह समय के साथ कुछ जमीन के अंदर चला गया और यहाँ एक
लपू बन गया जिसकी दो फलांग की दूरी पर गाँव के लोगों को बस्ती थी जो खेडा नाम से
जानी जाती है उस बस्ती के लोग यहाँ पर चास लेने आते थे और यहाँ पर अपनी खुरपी आदि
से घास काटा करते थे जिससे माता के सिर पर एक गडदा पड गया जो आज भी देखा जा
सकता है समय चक्र बदलने के बाद माता की पुनः प्रतिष्ठा एवं मन्दिर निर्माण के वारे में दो
तरह की मान्यताएं प्रचलित है। पहली मान्यता के अनुसार यह भूमि ग्वालियरराज्य के
अंतर्गत आती थी और ग्वालियर के महाराजा ने मन्दिर का निर्माण करवाया ।
दूसरी मान्यता के अनुसार ऐसा सुना जाता है कि समय चक्र बदलने के साथ राव भूपसिंह ने
मां की आज्ञानुसार मन्दिर का निर्माण कराया आज भी लोग राव भूपसिंह को उनके अपभ्रंस
नाम (पोप सिह) से माता के छन्दो द्वारा याद करते हैं
Bolo Bela Bhavani Maiya ki jai
